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Showing posts from December, 2020

Gold Price Today : सोने ने पकड़ी तेजी - चांदी ने भी मारी लम्बी छलांग

  सर्राफा बाजार में वीरवार को सोने ने फिर से रफ़्तार पकड़ी। वीरवार को राष्ट्रीय राजधानी में सोने कीमतों में 194 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई। सोने के दामों में  वैश्विक स्तर पर पर भी बढ़ोत्तरी देखने को मिली। इससे पहले सोने का भाव 49,261 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा था। वही चांदी भी वीरवार को जमकर चमकी और 1,184 रुपये की बढ़ोत्तरी के साथ 66,969 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इससे पहले चांदी की कीमत 65,785 प्रति किलोग्राम थी।  मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर वीरवार शाम 04:38 बजे फरवरी 2021 में डिलिवरी वाले सोने की कीमते आज के भाव से 463 रुपये तेजी के साथ 50,060 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेंड कर रही थी। जबकि अप्रैल 2021 में डिलिवरी वाले सोने का भाव 497 रुपये तेजी के साथ 50,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। 

पति को बंधक बनाकर उसके सामने ही पत्नी से 17 युवकों ने किया गैंगरेप

  मंगलवार की देर शाम दुमका क्षेत्र के घांसीपुर गांव में एक बहुत ही भयावह घटना घटी है। यहां पर एक बेबस पति के सामने ही उसकी पत्नी के साथ 17 युवकों ने दुष्कर्म  किया। पीड़िता अपने पति के साथ घांसीपुर साप्ताहिक हाट से लौट रही थी उसी समय वहा मौजूद लड़को ने उनको पकड़कर इस शर्मनाक घटना को अंजाम दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पांच युवकों ने पीड़िता के पति के हाथ-पैर पकड़कर उनको नीचे दबोच लिया और इस दौरान चीखने चिल्लाने और विरोध करने पर उन लड़को ने पीड़िता के पति के साथ मारपीट करते हुए उसकी फिर गर्दन पर आरोपी युवकों ने चाकू रख दिया। फिर आरोपी बेबस पति के सामने उसकी पत्नी को वही झाड़ीयो में ले गए और बारी-बारी से 17 युवकों ने दुष्कर्म किया। इस गैंगरेप के बाद पति-पत्नी को उनकी हालत पर छोड़कर सभी युवक वहा से फरार हो गए। पीड़िता ने घटना की जानकारी पंचायत के मुखिया, ग्राम प्रधान एवं अन्य ग्रामीणों को दी जिसके बाद ग्रामीण पीड़ित दंपति को लेकर मुफस्सिल थाना पहुंचे और इस घटना से पुलिस को अवगत करवाया। इस घटना की जानकारी होते ही डीआईजी सुदर्शन प्रसाद मंडल, एसपी अम्बर लकड़ा एवं डीएसपी विजय कुमार तुरंत मुफस्स

क्या किसान आंदोलन की आड़ में हो रही है किसानो की छवि बिगाड़ने की कोशिश ?

  किसान आंदोलन अपने चरम पर है। पांच बार भाई सरकार से वार्ता के बावजूद किसानो की मांगो को लेकर अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। किसान अपनी मांगो को लेकर झुकने को तैयार नहीं है जिसके चलते कल 8 दिसम्बर को किसानो ने भारत बंद का एलान किया है। किसान आंदोलन जैसे जैसे बढ़ता जा रहा है वैसे ही मन में कुछ संशय भी अब पैदा होने लगे है। किसान आंदोलन जब शुरू हुआ तो उसमे शामिल होने वाले निश्चित तौर पर किसान ही थे लेकिन अब बहुत सी राजनितिक पार्टियों के प्रतिनिधि भी उससे जुड़ने लगे है ताकि वो लोग भी इसकी आड़ में अपनी राजनीति की दूकान अच्छे से चमका सके। कुछ सस्ती TRP के चक्कर में फर्जी समाजसेवी भी आपको यहां फोटो लेते हुए दिख जाएंगे। हजारो किसान टिकरी बॉर्डर और सिंधु पर अपनी मांगो को लेकर अड़े हुए है। अब इतनी बड़ी भीड़ को देखकर राजनीतिक भेड़िये तो आएंगे ही क्योंकि उन के लिए तो यह किसी मौके से कम नहीं है क्योंकि जो भीड़ वो अपनी रैलियों में पैसे खर्च करके भी नहीं जुटा पाते वो उनको बैठे बिठाये मिल गई। जो आंदोलन किसानो की मांगो से शुरू हुआ था वो अब पूर्ण रूप से राजनितिक रंग से रंगा हुआ प्रतीत होता है।  बात यही