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जब पाकिस्तानी मीडिया भगत सिंह को याद कर रहा था तब भारत का मीडिया चटपटी खबरों से TRP ले रहा था

 

आज हुतात्मा भगतसिंह जी की जन्मजयंती है ….
भगतसिंह का जन्मस्थान वर्तमान पाकिस्तान वाले पंजाब में है ….
पाकिस्तान की मीडिया आज भगतसिंह पर कवरेज कर रहा है उनका गांव घर दिखा रहा है व अपनी सरकार से मांग कर रहा है कि उनके गांव घर को विकसित किया जाए राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए ….
और भारत में ?? ….
मैं तो टीवी देखता नहीं लेकिन मुझे यकीन है भारत के न्यूज़ चैनल रिया कंगना सुशांत दीपिका सारा ड्रग्स में ही उलझे होंगे ….
बतौर एक राष्ट्र आज पाकिस्तान क्या है ?? ….
पूरे विश्व का कर्जदार है …. अंतर्राष्ट्रीय ऋणों के बोझ के तले दबा कुचला एक गरीब मुल्क है …. वो मुल्क जो कर्ज ले के भी अपने नागरिकों को सड़क बिजली पानी शिक्षा स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं देने के बजाय ऋणों की राशि को आतंक सेना बम्ब गोला बारूद हथियारों पर खर्च करता है …. वो मुल्क जो दुनियां के सबसे खतरनाक आतंकी ओसामा-बिन-लादेन सहित विश्व के हर आतंकी सरगना व संगठनों को अपने यहां प्रश्रय देता है …. वो मुल्क जिसके तार हर अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घटना से जुड़े होते हैं …. वह मुल्क जिसकी सरजमीं आतंकी कैंपो शिविरों प्रशिक्षणों के लिए इस्तेमाल होती है ….
फिर भी आज के दिन वहां की मीडिया ने स्तरीय कवरेज की है ….
पाकिस्तान के न्यूज़ चैनल ग्लोबल है हर देश में प्रसारण होता है ….
भारतीय न्यूज़ चैनल भी ग्लोबल है हर देश में प्रसारण होता है ….
नेपाल के प्रधानमंत्री पर भारतीय मीडिया ने स्तरहीन पत्रकारिता की …. चीन की किसी महिला राजदूत को ले के ओली पर कई कार्यक्रम दिखाए ….
नतीजा ….
नेपाल ने अपने देश मे भारतीय न्यूज़ चैनलों का प्रसारण रोक दिया …. भारत नेपाल सम्बन्धों में आयी दरार का एक मुख्य कारण भारतीय मीडिया की पत्रकारिता भी है ….
भारत चीन के कड़वे सम्बन्धों में भी भारतीय मीडिया की वजह से ज्यादा कड़वाहट घुली है ….
थरथर कांपा चीन और बंकर में छुपा जिनपिंग जैसे कार्यक्रमों से चीन की नाराजगी बढ़ी है ….
आज हमारे देश के युवाओं किसानों जवानों व्यापारियों व्यक्तियों जनता समाज माताओं बहनों का अपना कोई स्वतंत्र चिंतन नहीं है …. हम क्या देखेंगे पढ़ेंगे लिखेंगे सोचेंगे और हमारे माइंड में किस घटना का क्या परसेप्शन बनना चाहिए यह नोएडा के आलीशान स्टूडियो में बैठे कुछ न्यूज़ चैनलों के मुट्ठी भर पत्रकार करते हैं ….
एजेंडा पत्रकारिता यही होती है ….
सच को झूठ और झूठ को सच बना के घटनाओं को परोसा जाता है ….
देश के महत्वपूर्ण मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाया जाता है ….
एक ही बेफिजूल की घटना को बार-बार दिखा के हमारे दिमाग मे उस घटना का फितूर भर दिया जाता है एवं आवश्यक घटनाओं की तरह हमारे माइंड को डाइवर्ट होने से रोक दिया जाता है ….
देश की संसद में पास विभिन्न बिलों पर चर्चा के बजाय एवं राष्ट्र के अन्य जरूरी मुद्दों विषयों घटनाओं के प्रसारण/चर्चा की बजाय भारतीय मीडिया अमिताभ कोरोना रिया रॉफेल सुशांत कंगना दीपिका सारा में राष्ट्र को उलझा देता है ….
लोकतंत्र के चतुर्थ स्तम्भ की ज़िम्मेदारी है सजगता एवं सतर्कता से राष्ट्र के नागरिकों तक सत्य खबरों को पहुंचाना ….
लेकिन ….
भारतीय मीडिया मुन्नी चमेली चंपा शबनम गुलाबो बाई के कोठे से गया गुजरा हो गया है ….
कोठे पर जिस्म बिकता है भारतीय मीडिया अपना ज़मीर बेंचता है ….
बतौर इक्कसवीं सदी के एक मजबूत सशक्त सक्षम आत्मनिर्भर ताकतवर शक्तिशाली विकासशील जागरूक राष्ट्र के यह किस दिशा में आगे बढ़ गए हैं हम!! …

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