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क्यूँ घटनाओं का सोशल मीडिया ट्रायल पुलिस फ़ोर्स को मनमानी करने की छूट देता है

 

हैदराबाद में एक युवा महिला डॉक्टर को बलात्कार के बाद ज़िंदा जला दिया गया

तेलंगाना पुलिस आरोपियों को अरेस्ट करती है क्राइम सीन री-क्रिएट करते वक़्त आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारे जाते हैं
मन्ने आरोपियों का एनकाउंटर हुआ था और कैसा एनकाउंटर हुआ था यह समझना रॉकेट साइंस नहीं है/था

देश उस समय उद्धवेलित था देशवासियों की भावनाओं का ज्वार चरम पर था और सब तेलंगाना पुलिस की जय-जय कर रहे थे
तेलंगाना पुलिस की जय-जय करने वाली भीड़ में मैं भी शामिल था

लेकिन
मेरे मन में एक भय था जो मैं उस वक़्त लिखना चाहता था परन्तु नहीं लिख पाया
आज लिख रहा हूँ

क्या वाकई वो ही 4 लड़के उस लेडी डॉक्टर की हत्या बलात्कार के दोषी थे ??

पुलिस का कहना था घटनास्थल के पास लड़कों के मोबाइल की लोकेशन ट्रेस हुई है …. कल को मैं और आप रात बेरात वक़्त बेवक़्त कहीं से गुजर रहे हो और वहां कोई वारदात घटित हुई हो फिर मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस हमको टपका दे तो ?? ….
पुलिस का कहना है पेट्रोलपंप की सीसीटीवी फुटेज में वारदात से पहले लड़के पेट्रोल ले रहे थे लेकिन न्यायालय में कोई भी तेजतर्रार अधिवक्ता पुलिस के इस दावे को धराशायी कर सकता था/है …. हम भी कहीं से गुजर रहे हो गाड़ी रास्ते में बन्द हो जाये तो एक दो किलोमीटर पैदल चल के पंप से पेट्रोल लाना पड़ता है …. मेरे साथ ऐसा तीन चार वार हो चुका ….
लड़की की लाश भी जल गयी थी फोरेंसिक जांच एवं पोस्टमार्टम में रेप साबित करना मुश्किल था ….
लिहाजा तेलंगाना पुलिस ने देश के गुस्से को देखते हुए वो एनकाउंटर किया होगा क्योंकि कोर्ट में उन लड़कों को दोषी सिद्ध करने में पुलिस वालों के पसीने छूट जाते ….

निर्भया केस का हश्र हमने देखा है मामला कितना लंबा चला …. फांसी कितनी लंबी टली …. आरोपियों ने बचने के कितने हथकंडे अपनाये

मालूम नहीं हैदराबाद वाले वो लड़के दोषी थे या निर्दोष उनको अपनी बेगुनाही साबित करने का मौका नहीं मिला
हाथरस केस के बाद देश में एक बड़े वर्ग की भावनाएं फिर उद्धवेलित है कि आरोपियों को फांसी दो …. एनकाउंटर करो …. टीयूवी पलटाओ ….
लेकिन
क्या हाथरस के वो चारों आरोपी वाकई गुनहगार है ??

परसों मेरे नोएडा के मित्र/भाई अजय प्रताप सिंह ने घटनास्थल से लाइव रिपोर्टिंग की थी
मीडिया व अनेक परिचितों के माध्यम से इस मामले में कुछ अन्य जानकारी भी निकल के आ रही है

कुछ (सीमित) लोगों का कहना है ये ओनर किलिंग है …. सत्य क्या है राम जाने ….
लेकिन एक बड़े वर्ग का कहना है कि इस प्रकरण में 3 लड़कों को बेवजह फंसाया गया है रंजिश में …. (यही बात अजय की रिपोर्टिंग में निकल के आ रही है)

अब अगर उत्तरप्रदेश शासन प्रशासन पुलिस दबाव में इन हाथरस वाले 4 लड़कों का एनकाउंटर कर दे तो ??
अगर एनकाउंटर में 3 लड़के निर्दोष मारे गए तो उनके परिवारों का क्या होगा ??

इसलिए मैं कहता हूँ पुलिस महज़ एक इन्वेस्टिगेशन एजेंसी है और देश के किसी भी राज्य की पुलिस अच्छी नहीं होती है

हमें हमारे देश/राज्यों को पुलिस स्टेट नहीं बनाना है …. पुलिस पर सरकारों का अंकुश होना चाहिए …. सलेक्टिव एनकाउंटर पर खुशियां वाहवाही सलेक्टिव एनकाउंटर पर मातम नहीं होना चाहिए

न्याय करने के लिए हमारे देश में न्यायपालिका है कोर्ट कानून जज वकील तंत्र है

पुलिस का काम जांच करना व आरोपियों को पकड़ना है एनकाउंटर करना नहीं है एनकाउंटर रेयर केसों में करना होता है ….

बाबाजी लखनऊ की सड़कों पर सीएए प्रोटेक्शन वालों के पोस्टर चिपकाते हैं और हम लहालोट होते हैं …. बाबाजी कोर्ट में मामला जाने के बाद पोस्टर चिपकाने वाला कानून या शायद हर्जाना वसूलने वाला कानून भी विधानसभा में पास करवाते हैं ….
हम खुश इसलिए होते हैं कि पोस्टर पर मुस्लिम्स की फ़ोटो चिपकी थी और उत्तरप्रदेश में हिन्दूवादी सीएम सरकार है ….
लेकिन

भविष्य में उत्तरप्रदेश में सपा बसपा कांग्रेस की सरकार बन गयी और हिन्दुओं के पोस्टर सड़कों पर चिपक गए तो ??
क्या उस वक़्त भी हम खुश होंगे या सपा बसपा कांग्रेस की लानत मलानत करेंगे ??

आज हम मुसलमानों के पोस्टर चिपकाने पर भाजपा की वाहवाही करते हैं लेकिन भविष्य में हिन्दुओं के पोस्टर चिपकाने पर हम सपा बसपा कांग्रेस की लानत मलानत करते है तो यह भी हमारी सलेक्टिव संवेदना ही हुई

उस वक़्त हम खुद के साथ इंसाफ नहीं कर पा रहे होते हैं .उस वक़्त हम नेताओं दलों के पपेट बन चुके होते हैं (जैसे आज अधिकांश भाजपाई घटनाओं पर दोहरा रवैया अपनाते हैं)

इसलिए मैं कहता हूँ हमारी चुनी हुई पसंदीदा सरकारें गलत करे तो उनकी आलोचना करो हर फैसले में उनका समर्थन मत करो …. गू को हलवा मत बनाओ

हाथरस मामले की जांच फास्टट्रैक कोर्ट में होगी

चारों आरोपियों को भी अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए ….
अगर उसमें 3 लड़के निर्दोष फंस रहे है तो उनको न्यायालय द्वारा दोषमुक्त करार दिया जाना चाहिए ….
परन्तु
आरोपित लड़कों एवं उनके वकीलों को अपनी बात रखने का अवसर भरपूर दिया जाना चाहिए
भारत का कानून भी यही कहता है ….
किसी निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए ….
हाँ जो गुनहगार निकले उसका समर्थन हम नहीं करते ….
घटनाओं का मीडिया सोशल-मीडिया ट्रायल नहीं होना चाहिए!! …

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