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कैसे और क्यों टाटा के तनिष्क ने हिन्दुओ की परंपराओ का मजाक उड़ाया

 

एक जिहादी मानसिकता का कर्मचारी आपके पूरे जीवन मे कमाए पुण्य को मिट्टी में मिला सकता है। इसलिए अपनी संस्थाओं में मन्सूर खान जैसे कर्मचारी रखने से पहले 10 बार सोचे। जिस टाटा ने पूरा जीवन पुण्य कमाया उसके पूरे जीवन के पुण्य को उसके एक जिहादी मानसिकता के कर्मचारी ब्रांड मैनेजर मन्सूर खान ने मिट्टी में मिला दिया…..!

खैर टाटा के प्रति मेरे मन मे तल भर भी दुर्भाव नही उनके प्रति मन मे अपार श्रद्धा थी, है और रहेगी, टाटा भारत के नवरत्न में एक रत्न समान है, जिसने भारत माता का नाम दुनिया मे ऊंचा किया। उनके देश के लिए काम और हर परिस्थितियों में देश को सहयोग करने के उनके त्याग को हम कभी नही भूल सकते।

गलती टाटा की नही बल्कि गलती उनकी उस दरियादिली की है जिसमे उन्होंने एक जिहादी को अपने संस्थान का ब्रांड मैनेजर बना दिया और उस जिहादी ने अपनी जिहादी मानसिकता से संस्थान को कलंक लगाया खैर उसकी कीमत तो उन्हें चुकानी पड़ेगी पर हम जैसे लोगो के लिए भी ये सीख है कि किसी जिहादी को गलती से भी अपने संस्थान में ऊंचे पद पर न बिठाएँ हो सके तो संस्थान में घुसने ही न दें ये लोग किसी भी पद पे पहुँच जाएं पर अपनी जिहादी मानसिकता नही छोड़ते…..!

अतः तनिष्क की घटना से सबक लें एक जिहादी कर्मचारी टाटा जैसे पुण्यात्मा को भी जलील करवा सकता है…..!

खैर संस्थान ने मन्सूर खान को नौकरी से निकाल दिया है पर उस जिहादी को जो हिंदुओं का अपमान और टाटा का नुकसान करना था वो कर गया। गलती हुई है सजा तो मिलेगी। पर हम आगे से ध्यान रखें और किसी जिहादी मानसिकता के लोगों को नौकरी पर रखने से पहले हजार बार सोचे…..!

सर आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि मैं एक छोटा सा civil painting contractar हूँ, में खुद इतना बड़ा हिन्दुवादी हूँ कि आज तक मेने किसी मुस्लिम को मजदूरी के लिए भी नहीं रखा,,,मेरी facebook लिस्ट में भी सिर्फ हिंदू ही हें,,,,ओर इस बात का मुझे स्वयं पर गर्व है,,,,

तनिष्क की जैसे फटी है वैसे ही फाड़े रखना जरूरी है।
सभ्यता और संस्कृति के नाम पर दोगलापन बर्दास्त नही किया जाएगा….
धर्म की रक्षा के लिए धर्म युद्ध करना पड़े तो पीछे मत हटना, महाभारत का सार यही है…..

कुछ लोग और भी ज्यादा शानदार हैं। जो अपनी वोटों का इस्तेमाल सिर्फ बैंक से लिए गए कर्ज को माफ करने के लिए गलत पार्टी को वोट देते हैं। कई दशकों से से यह कई राज्यों में सुचारू रूप से चल रहा था। किसी अभिव्यक्ति को देश से कोई मतलब नहीं। सिर्फ अपने दुखों से मुक्त होने के लिए अपने आने वाली और पीढ़ी के बच्चों को दुखी करने का प्रबंध कर चुका है।

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