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क्यूँ किसी भी अपराध को जातियों के आधार से नहीं जोड़ा जाना चाहिए : मेरी कहानी

 

छः आठ महीने पहले मेरे जिले (नागौर) में एक घटना हुई थी
मुझे उस घटना का मालूम फेसबुक पर तब चला जब एक ही दिन में मुझे 100 मित्रों ने अलग-अलग पोस्ट पर मेंशन किया कि यह आपके जिले/राज्य की घटना/वीडियो है
वीडियो विभत्स था
कुछ लड़कों ने एक लड़के के गुप्तांगों में पेचकश एवं पेट्रोल डाल दिया था
देखते-देखते इस घटना ने राजपूत बनाम दलित का रूप ले लिया था या इस घटना को जानबूझकर दलित बनाम राजपूत बना दिया गया था

(भाजपा नेताओं एवं फेसबुकिया भाजपा समर्थकों द्वारा क्योंकि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है)

नागौर की इस घटना के नेपथ्य में कोई जाना नहीं चाहता था कि वजह क्या थी इस प्रकरण की …. वैसे जो भी वजह रही हो मैं किसी अपराधी का महिमामंडन नहीं करता ना दो चार गलत लोगों के कारण पूरी कौम जिले राज्य को बदनाम करता …. अच्छे बुरे सही गलत अपराधी सज्जन लोग हर कौम में होते हैं  मेरी कौम में भी है
लेकिन नागौर की इस घटना से बदनामी किसकी हो रही थी ??
सिर्फ नागौर के राजपूतों की ??
सिर्फ राजस्थान के राजपूतों की ??

नहीं

हमारा नागौर जिला भौगोलिक क्षेत्रफल एवं जनसंख्या में राजस्थान के टॉप पांच जिलों में शुमार है

19500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल और 43 लाख जनसंख्या के साथ हम राजस्थान एवं भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं
यह केवल नागौर या राजस्थान के राजपूतों की बदनामी नहीं थी बल्कि बदनामी हो रही थी 43 लाख नागौरियों एवं 7.80 करोड़ राजस्थानियों की

इस घटना को तूल राजस्थान भाजपा एवं दिल्ली भाजपा और भाजपा नेताओं एवं भाजपा के दलित प्रकोष्ठ ने दिया था …. बाकी दलित चिंतकों संगठनों एवं अन्य राजनीतिक दलों ने भी तूल दिया था …. जयपुर दिल्ली से मानवाधिकार आयोग एवं दलित प्रकोष्ठ/आयोग की टीमें भेजी गयी थी नागौर में आरोपियों को घेरने माहौल खराब करने

और घेरा गया पूरी राजपूत कम्युनिटी को इस घटना में
फेसबुक पर भाजपा समर्थकों को यह मुद्दा खूब रास आया था

मैं बड़े दुःख के साथ लिख रहा हूँ इन फेसबुकिया भाजपा समर्थकों में क्षत्रिय जाति के युवा एवं अनेक व्यक्ति भी शामिल थे जो गैर-राजस्थानी क्षत्रिय है …. मन्ने उत्तरप्रदेश मध्यप्रदेश बिहार छत्तीसगढ़ गुजरात या अन्य राज्यों के क्षत्रिय ….
फेसबुक पर यह तक लिखा जा रहा था कि यह क्षत्रियों (राजस्थान के क्षत्रियों) की आज मानसिकता ऐसी है तो आज़ादी के पहले राजशाही में इन्होंने दलितों पर कितने अत्याचार किये होंगे
जबकि राजस्थान का इतिहास ऐसा नहीं है

हमारे रामदेवरा (रूणिचा/पोकरण) के लोकदेवता/शासक रामदेव बाबा (रामदेव तंवर) की समाधि के पास उनकी मुंह बोली बहन डाळी-बाई की समाधि बनी हुई है जो कि दलित समुदाय से थी
रूणिचा-धाम के विशाल मंदिर प्रांगण में आज भी दोनों समाधि विद्यमान है

रामदेव बाबा के मंदिरों में पूजा दलित करते हैं

हमारे सारे लोकदेवी/देवताओं के मंदिरों में दलितों को जाने की मनाही नहीं है ना कभी रही है …. बहुसंख्यक मंदिरों के पुजारी दलित ही है …. लोकदेवी-देवताओं की फड़ भजन जागरण रतजगा दलित गायक भोपे देते/गाते हैं …. फिर चाहे वो तेजाजी का मंदिर हो देवनारायण जी का मंदिर हो या रामदेवजी गोगाजी केसरिया-कुंवरजी भोमियाजी और हरिराम-बाबा के हजारों-हजारों मंदिर हो ….
जयपुर राजवंश में नए शासक का राजतिलक मीणा जनजाति के व्यक्ति करते हैं तो बीकानेर राजवंश में नए शासक का राजतिलक जाटों द्वारा किया जाता है

बाबा रामदेव से बड़ा दलित चिंतक उद्धारक भला कौन हुआ होगा ??
ऐसे सैंकड़ो हजारों उदाहरणों घटनाओं से राजस्थान का इतिहास भरा पड़ा है जो सिद्ध करता है राजस्थान में साम्प्रदायिक सामाजिक सौहार्द शानदार था …. वर्ग संघर्ष कभी नहीं था हमारे यहां
फिर भी नागौर वाली घटना में राजपूत कम्युनिटी को टारगेट किया गया
वजह
राजस्थान कांग्रेस शाषित राज्य है एवं सवर्ण बनाम दलित और राजपूत ब्राह्मण वैश्य बनाम दलित घटनाओं की राजनीतिक आंच पर राजनीति की रोटियां अच्छी सिकती है
अब ऐसी ही घटना हाथरस में हो गयी है

कुछ गलत लोगों की वजह से राजपूत कम्युनिटी को टारगेट किया जा रहा है जो कि गलत है मैं मानता हूँ
लेकिन
उत्तरप्रदेश बिहार मध्यप्रदेश के राजपूत युवा या समाज इस घटना के बाद सरकार एवं मुख्यमंत्री जी के बचाव में आ गए हैं ….
जबकि यही लोग नागौर वाली घटना में राजस्थान सरकार एवं राजस्थान के राजपूत समाज पर काफी लिख रहे थे …. इसे जंगलराज एवं सामंतशाही मानसिकता बता रहे थे
यह दोहरा मापदंड क्यों ??

एक तरफ आप कहते/लिखते हो सन्यासी की कोई जाति नहीं होती दूसरी तरफ आप उसी सन्यासी के एवं उनकी सरकार के समर्थन में डिफेंसिव हो जाते हो
आखिर ऐसा क्यों ??

मेरे ध्यान में नहीं योगी जी ने कभी खुद को ठाकुर राजपूत क्षत्रिय कहा हो …. अपनी सरकार में क्षत्रियों के लिए कोई अलग से लोक-कल्याणकारी योजना चलाई हो …. सरकारी नौकरियों में क्षत्रिय युवाओं को नियम ताक पर रख के झोली भर-भर के नौकरियां दी हो ….
फिर आप (क्षत्रिय समाज) क्यों अनावश्यक सरकार/मुख्यमंत्री का समर्थन कर के दूसरे वर्गों के मन मे ऐसी भावना लाते हो कि वाकई आपका मुख्यमंत्री जातिवादी या ठाकुरवादी है ??
या अपराधी आपकी कम्युनिटी के है ??

गैंगरेप नहीं हुआ
हत्या तो हुई ना . भले रंजिश में हुई हो या किसी भी वजह से हुई हो
न्यायालय इंसाफ करेगा जो दोषी है सजा पाएंगे जो निर्दोष है रिहा होंगे .

मीडिया भी कवरेज करेगी घटना को और विपक्ष भी इसपे सियासत करेगा आप रोक नहीं सकते उसे
नागौर वाली घटना पर भाजपा ने जम के सियासत की है और राजपूत कम्युनिटी को आड़े हाथों लिया है तो अब


कल रात के दो वीडियो और आये हैं जिनमें पुलिस परिवार पर दबाव बना रही है रात को अंतिम संस्कार करने का और कर भी दिया गया रातोंरात अंतिम संस्कार
आखिर क्यों ??
उत्तरप्रदेश शासन प्रशासन को इतनी जल्दी क्या थी अंतिम संस्कार करने की ??
मामला तो पेचीदा है ही
लेकिन मुझे दुःख इस बात का है कि

नागौर/राजस्थान की घटना पर कांग्रेस शाषित राज्य राजस्थान की सरकार व राजस्थान के राजपूत समाज को आड़े हाथों लेने वाले भाजपा नेता एवं समर्थक और गैर राजस्थानी क्षत्रिय समाज आज अपने ही राज्य की घटना पर डिफेंसिव हो गए ….
या तो आप राजनीतिक दलों का साथ दीजिये या अपनी कौम जाति समाज के साथ रहिये ….

सार्वजनिक जीवन मे नेताओं सरकारों की आलोचना समर्थन होता रहेगा
ना उत्तरप्रदेश के योगी जी वहां के राजपूतों को अतिरिक्त सुविधाएं दे रहे ना राजस्थान के भैरोसिंह जी ने राजपूतों को अतिरिक्त लाभ नौकरियां सुख सुविधाएं दी थी …. ना राजस्थान के आज के राजपूत सांसद विधायक मंत्री नेता अपनी कौम को अतिरिक्त लाभ पहुंचा रहे हैं.

नेता सन्यासी महापुरुष नायक खलनायक किसी जाति के नहीं होते!! ….

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