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अफगान और तालीबान के बीच हुआ शान्ति-वार्ता - दोनों तरफ से होगा सीज-फायर

 

दशको से चली आ रही लडाई जिसने हजारो लोगो को काल कवलित और इससे ही दोगुने लोगो को भुखमरी से मार दिया,एक बार फिर फिर उस लडाई को खत्म करने के लिए अफगान सरकार ने शान्ति समझौते के लिए तालिबानी मध्यस्थ के साथ बातचीत करना शुरू कर दिया है

क़तर के दोहा में हुयी इस बैठक में तालिबान की तरफ से Mawlavi Abdul Hakim अपनी बात रखने आया हैं जो तालिबान के मुख्य कमांडर हैबतुल्लाह के करीबी है वहीँ दूसरी तरफ अफगान सरकार की और अफगान सीक्रेट सेवा के अफसर Masoom Stanekzai की 21 सदस्यीय टीम थी

दोनों तरफ की वार्ता में आपसी तालमेल को बिठाने और हथियारों के प्रयोग पर रोक लगाने के प्रस्ताव रखे गये,और आपसी कैसियो के आदान-प्रदान पर बातें की गयी जिसके हिसाब से अफगान आर्मी 5000 से अधिक बंद किये गये तालिबान लडाको को छोड़ेगी वहीँ दूसरी तरफ तालिबान अफगन सेना के 1000 कैदी सैनिको को रिहा करेगा,

इस शान्ति वार्ता की शुरुआत बहुत दिनों से चली आ रही है या लेकिन फ़रवरी में ट्रम्प सरकार के कोशिशो के बाद शांतिवार्ता में तेजी आई और दोनों पक्षो से कतर में मिलने के लिए कहा गया ,

कैदियों की रिहाई से शुरुआत करते हुए अफगान सरकार ने तुरंत ही सात अफगानी कैदियों को छोड़ दिया गया जिसके तुरंत बाद ऑस्ट्रेलिया और फ़्रांस ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि अफगान सरकार उनके नागरिको की हत्या के मामले में आरोपित हत्यारों को छोड़कर सही नही कर रही है

वहीं एक्सपर्ट्स की माने तो दोनों तरफ से सीजफायर की उम्मीद बेमानी है क्युकी तालिबान की मुख्य ताकत उसकी मिलिट्री ताकत है जिससे वो जमीन पर मजबूत रहता है

वहीं प्रेसिडेंट अब्दुल घनी के कारबी सलाहकार ने एक इंटरव्यू में कहा है की ये तालिबान के लिए अपनी राजनितिक साख के लिए बहुत बढ़िया है अगर वो इसे नाकाम करना चाहते है तो ये केवल और केवल तालिबान के लिए खतरे का सौदा होगा क्युकी लम्बे समय तक लड़ाई नही लड़ी जा सकती

अफगानिस्तान में सरकार जहाँ लोकतान्त्रिक मूल्यों वाले नियम कानून लागू करना चाहती है वहीँ तालिबान देश में शरिया कानून लागू करना चाहती है जो पूरी तरह जंगली और पाशविक है

 

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