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भारत-चीन विवाद : वो कहानी जिसे शुरू करने वाले न रहे लेकिन अंत करने वाले मौजूद है

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दो दिग्गज, पुराना विवाद और अबकी बार कोई भी पीछे हटने को तैयार नही,कभी हटे तो कभी फिर से कब्जा करने की कोशिस ,
एशियाई देश भारत और चीन का बॉर्डर इन दिनों विवाद का मुख्य स्थान बन गया है, इधर भारत सरकार का कहना है की चीनी सैनिक बदले की कारवाई के लिए भारत को न उकसाए उधर चीन का कहना है की भारत बार बार चीनी सीमा पर अवैध निर्माण के लिए विवाद को बधा रहा है

चीन और भारत का विवाद दशको से चलता आ रहा है,तत्कालीन भारत के पीएम ने चीन के साथ अपने संबंधो को बहुत ही ज्यादा बढाने की कोशी की लेकिन उसके बावजूद चीन ने ऐसा न किया, चीन को लगा की भारत सरकार अपने सैनिको या अपने देश की सीमायों से ज्यादा पर्सनल ब्रांडिंग में लगे हुए है , नेहरु के हिंदी- चीनी भाई भाई के स्लोगन के बाद भी चीन ने कुछ महीनों बाद ही भारत पर आक्रमण कर दिया और अरुचाल प्रदेश की कई सिदो एकड़ जमीन पर कब्जा करने के बाद भी अपनी चीनी चाल से बाज नहीं आया

इधर भारटी के ततकालीन पीएम ने अपने सैकड़ो सैनिको की बली देने के बाद भी चीनियों के साथ निकटता बनाये रखी , चीन की इस हरकत के बावजूद वो इसे सिर्फ बंजर जमीन बताते हुये चीन को खुली छोट दे दी थी



नेहरु के बाद भी चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आया लेकिन जवाब देने वाली सरकारें नही आई,2014 में आई सरकार ने भी यही लाइन पकड ली और चीन के प्रेसेदेंत के साथ इलू इलू करने में लगे रहे उसके बाद जब सरकार दुबारा आई और चीन ने लगभग 20 से ज्यादा सैनिको की बली देने के बाद सरकार को होश आया और अब चीन पर कड़ी कारवाही करते हुए सबसे पहले बॉर्डर पर सैनिको को खुली छूट दी है जिसके बाद से चीन का कहना है की भारतीय सैनिक सीमा पार करते हुए चीन के बॉर्डर पर अवैध निर्माण कर रहे है इसके बाद से ही चीनी कम्पनीज पर सिकंजा कसते हुए उनके तमाम कामो पर रोक लगा दी है और लोगो की प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए चीनी एप्स को बैन कर दिया गया है ..एक अच्चा संकेत है की हम दुश्मनों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करेंगे

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