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वसुंधरा का कारनामा - विरोध के बावजूद अपराधी आनंदपाल का दाह संस्कार करवा दिया

 

हमारे यहां सांवराद (लाडनूं/नागौर) गांव में आनंदपाल सिंह का शव रखे 14 दिन हो चुके थे
यह शव एक डीप-फ्रीज़ में रखा हुआ था

क्षत्रिय समाज अपनी मांगों पर अड़ा हुआ था कि इस एनकाउंटर की सीबीआई जांच हो …. और कोई ज्यादा बड़ी विशेष मांगे या डिमांड नहीं थी

यह प्रदर्शन वसुंधरा सरकार के गले की हड्डी बन चुका था और उनको कैसे भी इस शव का दाह संस्कार करवाना था ….
13 वें दिन क्षत्रिय समाज व राजस्थान पुलिस में बड़ा संघर्ष भी हो चुका था
वसुंधरा सरकार ने एक नया रास्ता निकाला

पर्यावरण मंत्रालय राजस्थान ने एक अधिसूचना/नॉटिस जारी किया कि इस शव से अब महामारी फैल सकती है इसलिए इसका अंतिम संस्कार 24 घण्टों में कैसे भी करवा कर वसुंधरा सरकार नॉटिस के आदेश की अनुपालना से अवगत करवाये
इस पूरे ऑपरेशन की कमान वसुंधरा सरकार ने अजीतसिंह शेखावत (डीजी जेल राजस्थान) को सौंपी थी जो खुद क्षत्रिय समाज से आते थे….

राजस्थान के राजपूत समाज के बाकी आला पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों का भी घटनास्थल पर जमावड़ा था ….
सांवराद गांव में उस दिन क्षत्रिय समाज के प्रदर्शनकारी बहुत कम थे ….
शेखावत जी ने पहले भारी पुलिस जाब्ता लगाकर गांव को प्रदर्शनकारियों से खाली करवाया फिर नॉटिस की तामील करवाने आनंदपाल सिंह के घर स्वयं गए



आनंदपाल सिंह के घरवालों ने इस नॉटिस को स्वीकार नहीं किया ना उसपे किसी ने साइन किये ….
इसके बाद शेखावत जी ने पर्यावरण मंत्रालय का वो नॉटिस आनंदपाल सिंह के घर पर चस्पा करवाया फिर लाउड-स्पीकर से सांवराद गांव को सूचित किया कि हम कुछ देर बाद आनंदपाल सिंह के शव का अंतिम संस्कार करेंगे …. जो लोग अंतिम संस्कार में उपस्थित होना चाहते हैं वो अवश्य श्मशान-भूमि आये

उसके बाद शेखावत जी ने सांवराद गांव के एवं आनंदपाल सिंह के मोहल्ले के मौजिज लोगों को घरों से निकाल के एकत्रित किया उनसे वार्तालाप किया परिस्थिति से अवगत करवाया और उनकी मौजूदगी में शव को डीप-फ्रीज़ से निकाला ….
अंतिम संस्कार सूर्यास्त के वक़्त किया गया मन्ने जब मुखाग्नि दी गयी थी उस वक़्त सूर्य अस्त नहीं हुआ था करीब 15-20 मिनिट बाद अस्त हुआ था

हालांकि आनंदपाल सिंह के परिवार को बलपूर्वक किये इस अंतिम संस्कार पर आपत्ति थी लेकिन वसुंधरा सरकार ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में ऐसा कोई लूप-हॉल नहीं छोड़ा था जो आगे चलकर राजस्थान हाई-कोर्ट या सुप्रीम-कोर्ट में वसुंधरा सरकार के लिए सरदर्दी बने ….
जबकि वसुंधरा जी भी एक हठधर्मी नेता प्रशासक मुख्यमंत्री थी
बड़े फैसलों में दीर्घ राजनीतिक प्रशासनिक सूझबूझ अनुभव एवं दूरदर्शिता का होना अति-आवश्यक होता है

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